Friday, 20 October 2023

 II श्रीराम जय राम जय जय राम II


दीपक दीया तेल भरि, बाती दई अघट्ट I
पूरा किया बिसाहना, बहुरि न आँवौं हट्ट II


"Kabir says, living the wisdom of Sadguru in itself is the cessation of the unending cycle of birth, death and rebirth once and for all."


II श्रीराम जय राम जय जय राम II


II श्रीसद्गुरूचरणार्पणमस्तु II

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