Sunday, 9 October 2022

 II श्रीराम जय राम जय जय राम II


कबीर मुख सोई भला, जा मुख निकसै राम I
जा मुख राम न नीकसै, ता मुख है किस काम II


"Kabir says, blessed is the mouth that repeats Ram Nam incessantly. Worthless is the life  of he who enjoys ignorance more than remaining immersed in Ram Nam."


II श्रीराम जय राम जय जय राम II


II श्रीसद्गुरूचरणार्पणमस्तु II

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