Monday, 26 August 2024
सन्तो अचरज एक भौ भारी, कहौं तो को पतियाई I
"Kabir describes the universe, and the human experience, as an interplay of Purusha (the consciousness) and Prakṛti (the temporary, changing material world, nature). The former manifests itself as Atman (Soul, Self), and the latter as Maya.
II श्रीराम जय राम जय जय राम II
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II श्रीराम जय राम जय जय राम II कबीर टुक टुक देखता, पल पल गयी बिहाये I जीव जनजालय परि रहा, दिया दमामा आये II "Kabir says, we’re all cau...
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II श्रीराम जय राम जय जय राम II कबीर टुक टुक देखता, पल पल गयी बिहाये I जीव जनजालय परि रहा, दिया दमामा आये II "Kabir says, we’re all cau...
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II श्रीराम जय राम जय जय राम II जंगल ढेरी राख की,उपरि उपरि हरियाय I ते भी होती मानवी, करते रंग रलियाय II "Kabir says, we should underst...
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II श्रीराम जय राम जय जय राम II जब तू आया जगत में, लोग हँसे तू रोय I ऐसी करनी ना करी, पाछे हँसे सब कोय II WHEN YOU DIE, don't worry abou...
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