Friday, 5 July 2024
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब I
"Kabir says, the true happiness stems from being content with what is currently in our lives, rather than constantly dwelling on what may or may not come in the future. This composition encourages us to focus on the present moment and find joy in the simplicity of life.
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
II श्रीराम जय राम जय जय राम II कबीर टुक टुक देखता, पल पल गयी बिहाये I जीव जनजालय परि रहा, दिया दमामा आये II "Kabir says, we’re all cau...
-
II श्रीराम जय राम जय जय राम II कबीर टुक टुक देखता, पल पल गयी बिहाये I जीव जनजालय परि रहा, दिया दमामा आये II "Kabir says, we’re all cau...
-
II श्रीराम जय राम जय जय राम II जंगल ढेरी राख की,उपरि उपरि हरियाय I ते भी होती मानवी, करते रंग रलियाय II "Kabir says, we should underst...
-
II श्रीराम जय राम जय जय राम II जब तू आया जगत में, लोग हँसे तू रोय I ऐसी करनी ना करी, पाछे हँसे सब कोय II WHEN YOU DIE, don't worry abou...
No comments:
Post a Comment