Monday, 20 May 2024
कमलपत्र है साधू जन, बसै जगत के माहिं
Even when the lotus can be seen in all its glory, its roots are still firmly anchored in the muddy depths below. Without the roots, the flower could not exist. It is a wonderful contrast; roots anchored in the dark, thick, mud with a perfect flower resplendent in the sunlight.
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II श्रीराम जय राम जय जय राम II कबीर टुक टुक देखता, पल पल गयी बिहाये I जीव जनजालय परि रहा, दिया दमामा आये II "Kabir says, we’re all cau...
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II श्रीराम जय राम जय जय राम II जब तू आया जगत में, लोग हँसे तू रोय I ऐसी करनी ना करी, पाछे हँसे सब कोय II WHEN YOU DIE, don't worry abou...
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