Sunday, 27 August 2023

 II श्रीराम जय राम जय जय राम II


सुमरण से मन लाइए, जैसे पानी बिन मीन ।
प्राण तजे बिन बिछड़े, संत कबीर कह दिन ॥


"Kabir says, the longing for the constant remembrance of God's name should be like the longing of fish out of water to get into the water again."


II श्रीराम जय राम जय जय राम II


II श्रीसद्गुरूचरणार्पणमस्तु II

No comments:

Post a Comment

 II श्रीराम जय राम जय जय राम II कबीर टुक टुक देखता, पल पल गयी बिहाये I जीव जनजालय परि रहा, दिया दमामा आये II "Kabir says, we’re all cau...