Tuesday, 18 April 2023

 II श्रीराम जय राम जय जय राम II


जिसको रहना उतघरा, सो क्यों जोडे मित्त I
जैसे पर घर पाहुना, रहे उठाए चित्त II


"Kabir says, liberation in the truer sense is living in the world like a guest, who enjoys all the amenities offered by the host knowing that he owns nothing."


II श्रीराम जय राम जय जय राम II


II श्रीसद्गुरूचरणार्पणमस्तु II

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