Saturday, 4 June 2022

 II श्रीराम जय राम जय जय राम II


सुमिरन सोंमन लाइये, जैसे दीप पतंग I
प्राण तजे छिन एक रात में, जरत न मोरै अंग II


"Kabir says, our love for GOD should be like moth's longing to the flame. Moth jumps into the flame and dies yet is unafraid of getting burnt or of death."


II श्रीराम जय राम जय जय राम II


II श्रीसद्गुरूचरणार्पणमस्तु II

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