Monday, 13 June 2022

 II श्रीराम जय राम जय जय राम II


आगि आंचि सहना सुगम, सुगम खड्ग की धार I
नेह निबाह न एक रस, महा कठिन ब्योहार II


"Kabir says, fulfilling commitment to love is more difficult than bearing the scorching heat of fire or tolerating the cutting edge of the sword."


II श्रीराम जय राम जय जय राम II


II श्रीसद्गुरूचरणार्पणमस्तु II

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