Tuesday, 7 December 2021

 II श्रीराम जय राम जय जय राम II


गुरू मुरति गति चंद्रमा, सेवक नैन चकोर I
आठ पहर निरखत रहे, गुरू मुरति की और II


"In this composition Sant Kabirdas says, a true devotee remains absorbed in the devotion of his Spiritual Master just like the bird Chakor gazes at the moon all night unwaveringly."


II श्रीराम जय राम जय जय राम II


II श्रीसद्गुरूचरणार्पणमस्तु II

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