Sunday, 5 December 2021

 II श्रीराम जय राम जय जय राम II


ढोल दमामा गडफडी, सहनाई औ तूर I
तिनो निकसी न बाहूरै, साधु सती और शूर II


"In this composition Sant Kabirdas says, an ascetic holy person or a truly brave do not go back on their word just like the sound of drums or clarinet once played cannot be recalled."


II श्रीराम जय राम जय जय राम II


II श्रीसद्गुरूचरणार्पणमस्तु II

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