Tuesday, 16 November 2021

 II श्रीराम जय राम जय जय राम II


कबीर मुख सोई भला, जा मुख निकसै राम I

जा मुख राम न निकसै, ता मुख हैं किस काम II


"In this composition Sant Kabir says, Blessed is the mouth that utters the Holy RamNam incessantly Useless and aimless is the life of he whose mouth utters everything but the Holy RamNam."


II श्रीराम जय राम जय जय राम II


II श्रीसद्गुरूचरणार्पणमस्तु II

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