Sunday, 14 November 2021

 II श्रीराम जय राम जय जय राम II


जग में बैरी कोय नहीं, जो मन शीतल होय I

या आपा को डारि दे, दया करे सब कोय II


"In this composition Sant Kabir says, the peace of mind and enmity do not go together. We will be most adored if we let go our ego."


II श्रीराम जय राम जय जय राम II


II श्रीसद्गुरूचरणार्पणमस्तु II

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